श्री सर्वमंगला पीठम् — चारों युगों में नारी शक्ति को समर्पित एक दिव्य तीर्थ
श्री सर्वमंगला पीठम्, वृंदावन
सनातन संस्कृति को समर्पित, नारी शक्ति की दिव्य गाथा का प्रतीक
श्री सर्वमंगला पीठम्, वृंदावन की पुण्यभूमि पर निर्मित हो रहा वह सांस्कृतिक तीर्थ है जो चारों युगों में नारी के साहस, सेवा और संस्कार को अमर करता है। यह पीठ माँ सर्वमंगला को समर्पित है — जो सतयुग में सती, त्रेतायुग में सीता, द्वापर में द्रौपदी और कलियुग में आज की जाग्रत नारी के रूप में अपनी दिव्यता को प्रकट करती हैं।

सतयुग
सतयुग में वह सती थीं – भक्ति और बलिदान की प्रतिमूर्ति

त्रेता युग
त्रेता युग में वह सीता थीं – सद्गुण और धैर्य की आदर्श

द्वापर युग
द्वापर युग में वह द्रौपदी थीं – शक्ति और न्याय की प्रतीक

कलियुग
कलियुग में वह हर जागरूक नारी में जीवित हैं
श्री सर्वमंगला पीठम् में हम हर युग की नारी शक्ति को श्रद्धा से नमन कर, उन्हें एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में समर्पित कर रहे हैं।
यह पीठ कोई साधारण स्थापत्य नहीं, यह संघर्ष में तपस्या, सेवा में तेज, और त्याग में तेजस्विता की प्रतीक है। यहाँ हर शिला गूंजती है नारी के अद्वितीय योगदान की गाथा से
हमारा उद्देश्य एवं संकल्प
नारी शक्ति के सनातन स्वरूपों को जनमानस में पुनः स्थापित करना, जहाँ श्रद्धा, शक्ति और संस्कृति का संगम हो।
५१ शक्तिरूपों का मंदिर
माँ शक्ति के ५१ दिव्य रूपों को समर्पित एक भव्य मंदिर
युगों की स्त्री प्रतीकात्मक प्रस्तुति
चारों युगों में नारी शक्ति की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति
वैदिक गुरुकुल
वैदिक ज्ञान और आध्यात्मिक शिक्षा का पारंपरिक केंद्र
नारी शक्ति संग्रहालय
इतिहास में महिलाओं के योगदान का उत्सव
कन्यापोषण केंद्र
बालिकाओं के कल्याण और सशक्तिकरण की पहल
अन्नदान रसोई
भक्तों और जरूरतमंदों के लिए नि:शुल्क भोजन सेवा
आईए, इस युग परिवर्तन के दिव्य संकल्प में सहभागी बनें
अपने पुण्य का भाग इस सांस्कृतिक यज्ञ में अर्पित करें
यह केवल दान नहीं — यह सनातन संस्कृति को भविष्य तक पहुँचाने का प्रयास है
आप निम्नलिखित सेवाओं के माध्यम से सहयोग कर सकते हैं
संग्रहालय व रसोई निर्माण दान
एक आध्यात्मिक रसोई की स्थापना में सहयोग करें जो साधकों और संतों को भोजन कराएगी
मासिक या वार्षिक भक्ति सहयोग
नियमित सहयोग देकर मासिक पूजाओं, हवनों और अनुष्ठानों का हिस्सा बनें
झलकियाँ – सेवा से संकल्प तक
शिलान्यास समारोह की झलकियाँ


पूज्य दीदी माँ साध्वी ऋतम्भरा जी का सान्निध्य






निर्माण की प्रगति की तस्वीरें




भक्तों के अनुभव और प्रेरणाए
I had many questions about my spiritual path. When I meditated at the Peetham, I felt guided from within. It was as if the Goddess had answered my doubts in silence. I now walk my path with confidence and devotion.”
Nitesh Jain, Vrindavan
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह कोई दान नहीं है। यह सनातन धर्म के भविष्य के लिए एक समर्पण है।
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः"
"जहाँ स्त्रियों का सम्मान होता है, वहाँ देवत्व का वास होता है।"
आपका प्रत्येक योगदान सनातन धर्म की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और प्रचारित करने में सहायता करता है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ नारी शक्ति के सिद्धांत को समझें और उसका सम्मान करें।
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