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Didi Maa

जगत में अनुकूलताओं की लालसा देवताओं ही नहीं बल्कि दानवों के भी कदमों में नाक रगड़वाती है।

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Didi Maa

हम चाहे जितने विद्वान हो जाएं, सदा अपने बड़ों का सम्मान करना चाहिए। हमारी विद्वता निश्चित ही उनके अनुभवों के समक्ष कम है, यह मन से मान लेना हमारे चरित्र को विनम्रता की ऊँचाईयों पर ले जाता है।

हम चाहे जितने विद्वान हो जाएं, सदा अपने बड़ों का सम्मान करना चाहिए। हमारी विद्वता निश्चित ही उनके अनुभवों के समक्ष कम है, यह मन से मान लेना हमारे चरित्र को विनम्रता की ऊँचाईयों पर ले जाता है। Read More »

Didi Maa

जीवन का अंतिम क्षण भी यदि बच्चों के समान अचरज से भरा हुआ, बाल सुलभ किलकारियाँ भर रहा हो तो समझिए कि आप जीते जी मुक्त हो गए।

जीवन का अंतिम क्षण भी यदि बच्चों के समान अचरज से भरा हुआ, बाल सुलभ किलकारियाँ भर रहा हो तो समझिए कि आप जीते जी मुक्त हो गए। Read More »

Didi Maa

जिस व्यवहार की अपेक्षा हम औरों से करते हैं, वो हमारे स्वयं के जीवन में औरों को दिखना चाहिए।

जिस व्यवहार की अपेक्षा हम औरों से करते हैं, वो हमारे स्वयं के जीवन में औरों को दिखना चाहिए। Read More »

DIdi Maa

बाल मनोविज्ञान की सही समझ प्राप्त करके ही अभिवावक अपने बच्चों को उचित शिक्षा और संस्कार दे सकते हैं।

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Didi Maa

जैसे एक नदी मार्ग की बाधाओं से टकरा कर और भी वेगवती होती जाती है, वैसे ही हमें भी जीवन संघर्षों से जूझ कर और अधिक मजबूती से जीवन पथ पर आगे बढ़ना चाहिए।

जैसे एक नदी मार्ग की बाधाओं से टकरा कर और भी वेगवती होती जाती है, वैसे ही हमें भी जीवन संघर्षों से जूझ कर और अधिक मजबूती से जीवन पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। Read More »

Didi Maa

नित्य सम्बन्ध उनसे हो सकता है, जो कभी हमसे अलग न हों और ऐसा कोई एक है जरूर परन्तु वो जगत के समान उत्पत्ति या विनाश युक्त नहीं है। वो अन उत्पन्न अविनाशी है, उसी से अपना नित्य सम्बन्ध है।

नित्य सम्बन्ध उनसे हो सकता है, जो कभी हमसे अलग न हों और ऐसा कोई एक है जरूर परन्तु वो जगत के समान उत्पत्ति या विनाश युक्त नहीं है। वो अन उत्पन्न अविनाशी है, उसी से अपना नित्य सम्बन्ध है। Read More »